Best 151+ Hawa Shayari in Hindi | हवा लव शायरी

हमारा दिल सवेरे का सुनहरा जाम हो जाए..!!
चराग़ों की तरह आँखें जलें जब शाम हो जाए..!!

कभी तो आसमाँ से चाँद उतरे जाम हो जाए..!!
तुम्हारे नाम की इक ख़ूब-सूरत शाम हो जाए..!!

अजब हालात थे यूँ दिल का सौदा हो गया आख़िर..!!
मोहब्बत की हवेली जिस तरह नीलाम हो जाए..!!

समुंदर के सफ़र में इस तरह आवाज़ दे हम को..!!
हवाएँ तेज़ हों और कश्तियों में शाम हो जाए..!!

मुझे मालूम है उस का ठिकाना फिर कहाँ होगा..!!
परिंदा आसमाँ छूने में जब नाकाम हो जाए..!!

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो..!!
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए..!!

सहरा से आने वाली हवाओं में रेत है..!!
हिजरत करूँगा गाँव से गाँव में रेत है..!!

Hawa Shayari in Hindi

ऐ क़ैस तेरे दश्त को इतनी दुआएँ दीं..!!
कुछ भी नहीं है मेरी दुआओं में रेत है..!!

सहरा से हो के बाग़ में आ हूं सैर को..!!
हाथों में फूल हैं मिरे पाँव में रेत है..!!

मुद्दत से मेरी आँख में इक ख़्वास है मुक़ीम..!!
पानी में पेड़ पेड़ की छाँव में रेत है..!!

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मुझ सा कोई फ़क़ीर नहीं है कि जिस के पास..!!
कश्कोल रेत का है सदाओं में रेत है..!!

ख़ुदा की शायद रज़ा हो इस में..!!
तुम्हारा जो फ़ैसला रहा था..!!

दुआ करो कि ये पौदा सदा हरा ही लगे..!!
उदासियों में भी चेहरा खिला खिला ही लगे..!!

वो सादगी न करे कुछ भी तो अदा ही लगे..!!
वो भोल-पन है कि बेबाकी भी हया ही लगे..!!

हवा लव शायरी

ये ज़ाफ़रानी पुलओवर उसी का हिस्सा है..!!
कोई जो दूसरा पहने तो दूसरा ही लगे..!!

नहीं है मेरे मुक़द्दर में रौशनी न सही..!!
ये खिड़की खोलो ज़रा सुब्ह की हवा ही लगे..!!

अजीब शख़्स है नाराज़ हो के हँसता है..!!
मैं चाहता हूँ ख़फ़ा हो तो वो ख़फ़ा ही लगे..!!

हसीं तो और हैं लेकिन कोई कहाँ तुझ सा..!!
जो दिल जलाए बहुत फिर भी दिलरुबा ही लगे..!!

हज़ारों भेस में फिरते हैं राम और रहीम..!!
कोई ज़रूरी नहीं है भला भला ही लगे..!!

दावा किया था गुल ने तिरे रुख़ से बाग़ में..!!
सैली लगी सबा की तो मुँह लाल हो गया..!!

ये हम जो हिज्र में दीवार-ओ-दर को देखते हैं..!!
कभी सबा को कभी नामा-बर को देखते हैं..!!

Hawa Shayari

कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी..!!
दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी..!!

इक नाम क्या लिखा तिरा साहिल की रेत पर..!!
फिर उम्र भर हवा से मेरी दुश्मनी रही..!!

हवा से कह दो खुद को आज़मा के दिखाये..!!
बहुत चिराग बुझाती है एक जला के दिखाये..!!

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चराग़ में रौशनी माना कम है..!!
मग़र मिरे हौंसलों में भी दम है..!!

हवा से है दोस्ताना मेरा भी..!!
उड़ान के वास्ते इक आसमाँ कम है..!!

तारीकियों को आग लगे और दिया जले..!!
ये रात बैन करती रहे और दिया जले..!!

उस की ज़बाँ में इतना असर है कि निस्फ़ शब..!!
वो रौशनी की बात करे और दिया जले..!!

हवा शायरी रेख़्ता

तुम चाहते हो तुम से बिछड़ के भी ख़ुश रहूँ..!!
या’नी हवा भी चलती रहे और दिया जले..!!

जहाँ सारे हवा बनने की कोशिश कर रहे थे..!!
वहाँ भी हम दिया बनने की कोशिश कर रहे थे..!!

हमें ज़ोर-ए-तसव्वुर भी गँवाना पड़ गया हम..!!
तसव्वुर में ख़ुदा बनने की कोशिश कर रहे थे..!!

ज़मीं पर आ गिरे जब आसमाँ से ख़्वाब मेरे..!!
ज़मीं ने पूछा क्या बनने की कोशिश कर रहे थे..!!

उन्हें आँखों ने बेदर्दी से बे-घर कर दिया है..!!
ये आँसू क़हक़हा बनने की कोशिश कर रहे थे..!!

हमें दुश्वारियों में मुस्कुराने की तलब थी..!!
हम इक तस्वीर सा बनने की कोशिश कर रहे थे..!!

आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो..!!
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो..!!

Sad Hawa Shayari in Hindi

राह के पत्थर से बढ़ कर कुछ नहीं हैं मंज़िलें..!!
रास्ते आवाज़ देते हैं सफ़र जारी रखो..!!

एक ही नद्दी के हैं ये दो किनारे दोस्तो..!!
दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो..!!

आते जाते पल ये कहते हैं हमारे कान में..!!
कूच का ऐलान होने को है तय्यारी रखो..!!

ये ज़रूरी है कि आँखों का भरम क़ाएम रहे..!!
नींद रखो या न रखो ख़्वाब मेयारी रखो..!!

ये हवाएँ उड़ न जाएँ ले के काग़ज़ का बदन..!!
दोस्तो मुझ पर कोई पत्थर ज़रा भारी रखो..!!

ले तो आए शाइरी बाज़ार में ‘राहत’ मियाँ..!!
क्या ज़रूरी है कि लहजे को भी बाज़ारी रखो..!!

वो ख़त के पुर्ज़े उड़ा रहा था..!!
हवाओं का रुख़ दिखा रहा था..!!

जहरीली हवा शायरी

बताऊँ कैसे वो बहता दरिया..!!
जब आ रहा था तो जा रहा था..!!

कुछ और भी हो गया नुमायाँ..!!
मैं अपना लिक्खा मिटा रहा था..!!

धुआँ धुआँ हो गई थीं आँखें..!!
चराग़ को जब बुझा रहा था..!!

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मुंडेर से झुक के चाँद कल भी..!!
पड़ोसियों को जगा रहा था..!!

उसी का ईमाँ बदल गया है..!!
कभी जो मेरा ख़ुदा रहा था..!!

वो एक दिन एक अजनबी को..!!
मिरी कहानी सुना रहा था..!!

किसी ग़रीब की रोटी पे अपना नाम न लिख..!!
किसी ग़रीब की रोटी में इंक़िलाब भी है..!!

Hawa Shayari in Hindi for instagram

मिरा सवाल कोई आम सा सवाल नहीं..!!
मिरा सवाल तिरी बात का जवाब भी है..!!

इसी ज़मीन पर हैं आख़िरी क़दम अपने..!!
इसी ज़मीन में बोया हुआ शबाब भी है..!!

सभी बातें सुनी तुम ने..!!
फिर आँखें फेर लीं तुम ने..!!

मैं तब जा कर कहीं समझा..!!
कि तुम ने कुछ नहीं समझा..!!

यार हवा से कैसे आग भड़क उठती है..!!
लफ़्ज़ कोई अँगारा कैसे हो सकता है..!!

बे-सम्त हवाओं ने हर लहर से साज़िश की..!!
ख़्वाबों के जज़ीरे का नक़्शा भी नहीं बदला..!!

मैं क़िस्सा मुख़्तसर कर के..!!
ज़रा नीची नज़र कर के..!!

ठंडी हवा पर शायरी

ये कहता हूँ अभी तुम से..!!
मोहब्बत हो गई तुम से..!!

कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है..!!
फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है..!!

कैसे किसी की याद हमें ज़िंदा रखती है..!!
एक ख़याल सहारा कैसे हो सकता है..!!

तुझ से जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती..!!
तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है..!!

कौन ज़माने-भर की ठोकरें खा कर ख़ुश है..!!
दर्द किसी को प्यारा कैसे हो सकता है..!!

हम भी कैसे एक ही शख़्स के हो कर रह जाएँ..!!
वो भी सिर्फ़ हमारा कैसे हो सकता है..!!

कैसे हो सकता है जो कुछ भी मैं चाहूँ..!!
बोल ना मेरे यारा कैसे हो सकता है..!!

Ishq Ki Hawa

कश्ती भी नहीं बदली दरिया भी नहीं बदला..!!
और डूबने वालों का जज़्बा भी नहीं बदला..!!

तस्वीर नहीं बदली शीशा भी नहीं बदला..!!
नज़रें भी सलामत हैं चेहरा भी नहीं बदला..!!

है शौक़-ए-सफ़र ऐसा इक उम्र से यारों ने..!!
मंज़िल भी नहीं पाई रस्ता भी नहीं बदला..!!

बेकार गया बन में सोना मिरा सदियों का..!!
इस शहर में तो अब तक सिक्का भी नहीं बदला..!!

वो उम्र कम कर रहा था मेरी..!!
मैं साल अपने बढ़ा रहा था..!!

क्या मुझ से भी अज़ीज़ है तुम को दिए की लौ..!!
फिर तो मेरा मज़ार बने और दिया जले..!!

सूरज तो मेरी आँख से आगे की चीज़ है..!!
मैं चाहता हूँ शाम ढले और दिया जले..!!

हवा में उड़ने वालों के लिए शायरी

तुम लौटने में देर न करना कि ये न हो..!!
दिल तीरगी में घेर चुके और दिया जले..!!

कौन आएगा यहाँ कोई न आया होगा..!!
मेरा दरवाज़ा हवाओं ने हिलाया होगा..!!

दिल-ए-नादाँ न धड़क ऐ दिल-ए-नादाँ न धड़क..!!
कोई ख़त ले के पड़ोसी के घर आया होगा..!!

इस गुलिस्ताँ की यही रीत है ऐ शाख़-ए-गुल..!!
तू ने जिस फूल को पाला वो पराया होगा..!!

दिल की क़िस्मत ही में लिक्खा था अंधेरा शायद..!!
वर्ना मस्जिद का दिया किस ने बुझाया होगा..!!

गुल से लिपटी हुई तितली को गिरा कर देखो..!!
आँधियो तुम ने दरख़्तों को गिराया होगा..!!

खेलने के लिए बच्चे निकल आए होंगे..!!
चाँद अब उस की गली में उतर आया होगा..!!

Hawa ki Shayari

‘कैफ़’ परदेस में मत याद करो अपना मकाँ..!!
अब के बारिश ने उसे तोड़ गिराया होगा..!!

सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा..!!
इतना मत चाहो उसे वो बेवफ़ा हो जाएगा..!!

हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है..!!
जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा..!!

पहले मैं अकेला ही उसे पुकारता था..!!
अब ये ठंडी हवाएं भी उसे पुकारती है..!!

ठंडी हवा और बेइज्जती..!!
जितनी महसूस करोगे उतनी ज्यादा लगेगी..!!

हवा का झोंका आया, साथ तेरी खुशबू लेकर आया..!!
मैं समझ गया, तू आज फिर नहीं नहाया..!!

ठण्ड के समय में सुबह बड़ी इम्तिहान की घड़ी होती हैं..!!
रोज सुबह-सुबह ठंड में नहाना बहुत बड़ी बात होती हैं..!!

हवाओं का रुख

पहन लो स्वेटर आपसे यही हैं गुज़ारिश..!!
बाहर चल रही है ठंडी हवा की बारिश..!!

जिस में सारा ही शहर दफ़्न हुआ..!!
फ़ैसले सब अटल हवा के रहे..!!

साँस भी तुम लेते हो क्यूँ-कर..!!
उफ़ कितनी मस्मूम हवा है..!!

मैं अकेला उसे पुकारता था..!!
अब हवा भी उसे पुकारती है..!!

जा रहे हो किधर ‘रसा’ मिर्ज़ा..!!
देखते हो हवा किधर की है..!!

मैं ऐसा पागल दिया था जिस ने..!!
हवा को अपना समझ लिया था..!!

मसअला जब भी चराग़ों का उठा..!!
फ़ैसला सिर्फ़ हवा करती है..!!

Hawa Shayari Photo

बहार आई तो फूलों से उन की ख़ुशबू ली..!!
हवा चली तो हवा से ख़िराम उस ने लिया..!!

मैं कुछ कहूँ भी तो कैसे कि वो समझते हैं..!!
हमारी ज़ात हवा है हमारी बात हवा..!!

हवा को आते जब देखा..!!
रौशन किया दिया मैंने..!!

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चूर चूर हो गया सरफिरी हवाओं का सारा ग़ुरूर..!!
इक दिया खुली छत पर रातभर जलता रहा..!!

हवा तो है ही मुख़ालिफ़ मुझे डराता है क्या..!!
हवा से पूछ के कोई दिए जलाता है क्या..!!

हवा के दोश पे रक्खे हुए चराग़ हैं हम..!!
जो बुझ गए तो हवा से शिकायतें कैसी..!!

है आज रुख़ हवा का मुआफ़िक़ तो चल निकल..!!
कल की किसे ख़बर है किधर की हवा चले..!!

हवा पर शायरी

रोज़ कहता है हवा का झोंका..!!
आ तुझे दूर उड़ा ले जाऊँ..!!

हवा के साथ सफ़र का न हौसला था जिसे..!!
सभी को ख़ौफ़ उसी लम्हा-ए-शरर से था..!!

ऐसा न हो कि ताज़ा हवा अजनबी लगे..!!
कमरे का एक-आध दरीचा खुला भी रख..!!

ये हवा यूँ ही ख़ाक छानती है..!!
या कोई चीज़ खो गई है यहाँ..!!

हवा दरख़्तों से कहती है दुख के लहजे में..!!
अभी मुझे कई सहराओं से गुज़रना है..!!

उन के रुख़ पे देख कर आँचल हवा..!!
और पागल हो गई पागल हवा..!!

कहने लगा खुलते हुए दरवाज़ा हवा से..!!
ये पहला तआरुफ़ है मिरा ताज़ा हवा से..!!

Hawa Shayari images

अब हवाएँ ही करेंगी रौशनी का फ़ैसला..!!
जिस दिए में जान होगी वो दिया रह जाएगा..!!

कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी..!!
दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी..!!

यक़ीन हो तो कोई रास्ता निकलता है..!!
हवा की ओट भी ले कर चराग़ जलता है..!!

जलाने वाले जलाते ही हैं चराग़ आख़िर..!!
ये क्या कहा कि हवा तेज़ है ज़माने की..!!

वहाँ कैसे कोई दिया जले, जहाँ दूर तक हवा न हो..!!
उन्हें हाले-दिल न सुनाइये, जिन्हें दर्दे-दिल का पता न हो..!!

हों अजब तरह की शिकायतें, हों अजब तरह की इनायतें..!!
तुझे मुझसे शिकवे हज़ार हों, मुझे तुझसे कोई गिला न हो..!!

कोई ऐसा शेर भी दे ख़ुदा, जो तेरी अता हो, तेरी अता..!!
कभी जैसा मैंने कहा न हो, कभी जैसा मैंने सुना न हो..!!

हवा शायरी

न दिये का है, न हवा का है, यहाँ जो भी कुछ है ख़ुदा का है..!!
यहाँ ऐसा कोई दिया नहीं, जो जला हो और वो बुझा न हो..!!

मैं मरीज़े-इश्क़ हूँ चारागर, तू है दर्दे-इश्क़ से बेख़बर..!!
ये तड़प ही इसका इलाज है, ये तड़प न हो तो शिफ़ा न हो..!!

सारे मंज़र दिलकश थे हर बात सुहानी लगती थी..!!
जीवन की हर शाम हमें तब एक कहानी लगती थी..!!

जिस का चाँद सा चेहरा था और ज़ुल्फ़ सुनहरी बादल सी..!!
मस्त हवा का आँचल थामे एक दिवानी लगती थी..!!

अपने ख़्वाब नए लगते थे और फिर उन के आगे सब..!!
दुनिया और ज़माने की हर बात पुरानी लगती थी..!!

प्यार के मौसम की ख़ुशबू से ग़ुंचा ग़ुंचा महका था..!!
महकी महकी दुनिया सारी रात की रानी लगती थी..!!

लम्हों के रंगीन ग़ुबारे हाथ से छूटे जाते थे..!!
मौसम दुख का दर्द की रुत सब आनी-जानी लगती थी..!!

Hawa ka Rukh Shayari

क़ौस-ए-क़ुज़ह की बारिश में ये जज़्बों की मुँह ज़ोर हवा..!!
मौज उड़ाते बल खाते दरिया की रवानी लगती थी..!!

अब देखें तो दूर कहीं पर यादों की फुलवारी में..!!
रंगों से भरपूर फ़ज़ा थी जो लाफ़ानी लगती थी..!!

उजड़े हुए लोगों से गुरेज़ाँ न हुआ कर..!!
हालात की क़ब्रों के ये कतबे भी पढ़ा कर..!!

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क्या जानिए क्यूँ तेज़ हवा सोच में गुम है..!!
ख़्वाबीदा परिंदों को दरख़्तों से उड़ा कर..!!

उस शख़्स के तुम से भी मरासिम हैं तो होंगे..!!
वो झूट न बोलेगा मिरे सामने आ कर..!!

हर वक़्त का हँसना तुझे बर्बाद न कर दे..!!
तन्हाई के लम्हों में कभी रो भी लिया कर..!!

वो आज भी सदियों की मसाफ़त पे खड़ा है..!!
ढूँडा था जिसे वक़्त की दीवार गिरा कर..!!

Ishq Ki Hawa – इश्क की हवा

ऐ दिल तुझे दुश्मन की भी पहचान कहाँ है..!!
तू हल्क़ा-ए-याराँ में भी मोहतात रहा कर..!!

इस शब के मुक़द्दर में सहर ही नहीं ‘मोहसिन’..!!
देखा है कई बार चराग़ों को बुझा कर..!!

बारिश हुई तो फूलों के तन चाक हो गए..!!
मौसम के हाथ भीग के सफ़्फ़ाक हो गए..!!

बादल को क्या ख़बर है कि बारिश की चाह में..!!
कैसे बुलंद-ओ-बाला शजर ख़ाक हो गए..!!

जुगनू को दिन के वक़्त परखने की ज़िद करें..!!
बच्चे हमारे अहद के चालाक हो गए..!!

लहरा रही है बर्फ़ की चादर हटा के घास..!!
सूरज की शह पे तिनके भी बेबाक हो गए..!!

बस्ती में जितने आब-गज़ीदा थे सब के सब..!!
दरिया के रुख़ बदलते ही तैराक हो गए..!!

Hawayein Quotes

सूरज-दिमाग़ लोग भी अबलाग़-ए-फ़िक्र में..!!
ज़ुल्फ़-ए-शब-ए-फ़िराक़ के पेचाक हो गए..!!

जब भी ग़रीब-ए-शहर से कुछ गुफ़्तुगू हुई..!!
लहजे हवा-ए-शाम के नमनाक हो गए..!!

ये वादियां ये फ़ज़ाएं बुला रही हैं तुम्हें..!!
ख़मोशियों की सदाएं बुला रही हैं तुम्हें..!!

तरस रहे हैं जवां फूल होंट छूने को..!!
मचल मचल के हवाएं बुला रही हैं तुम्हें..!!

तुम्हारी ज़ुल्फ़ों से ख़ुशबू की भीक लेने को..!!
झुकी झुकी सी घटाएं बुला रही हैं तुम्हें..!!

हसीन चम्पई पैरों को जब से देखा है..!!
नदी की मस्त अदाएं बुला रही हैं तुम्हें..!!

मिरा कहा न सुनो उन की बात तो सुन लो..!!
हर एक दिल की दुआएं बुला रही हैं तुम्हें..!!

Hawayein Shayari

तेरी आगोश में सर रखा सिसक कर रोए..!!
मेरे सपने मेरी आँखों से छलक कर रोए..!!

सारी खुशियों को सरे आम झटक कर रोये..!!
हम भी बच्चों की तरह पाँव पटक कर रोए..!!

रास्ता साफ़ था मंज़िल भी बहुत दूर न थी..!!
बीच रस्ते में मगर पाँव अटक कर रोए..!!

जिस घड़ी क़त्ल हवाओं ने चराग़ों का किया..!!
मेरे हमराह जो जुगनू थे फफक कर रोए..!!

क़ीमती ज़िद थी, गरीबी भी भला क्या करती..!!
माँ के जज़बात दुलारों को थपक कर रोए..!!

अपने हालात बयां करके जो रोई धरती..!!
चाँद तारे किसी कोने में दुबक कर रोए..!!

बामशक्कत भी मुकम्मल न हुई अपनी ग़ज़ल..!!
चंद नुक्ते मेरे काग़ज़ से सरक कर रोए..!!

Hawa par kavita

नज़र से गुफ़्तुगू ख़ामोश लब तुम्हारी तरह..!!
ग़ज़ल ने सीखे हैं अंदाज़ सब तुम्हारी तरह..!!

जो प्यास तेज़ हो तो रेत भी है चादर-ए-आब..!!
दिखाई दूर से देते हैं सब तुम्हारी तरह..!!

बुला रहा है ज़माना मगर तरसता हूँ..!!
कोई पुकारे मुझे बे-सबब तुम्हारी तरह..!!

हवा की तरह मैं बे-ताब हूँ कि शाख़-ए-गुलाब..!!
लहकती है मिरी आहट पे अब तुम्हारी तरह..!!

मिसाल-ए-वक़्त में तस्वीर-ए-सुब्ह-ओ-शाम हूँ अब..!!
मिरे वजूद पे छाई है शब तुम्हारी तरह..!!

सुनाते हैं मुझे ख़्वाबों की दास्ताँ अक्सर..!!
कहानियों के पुर-असरार लब तुम्हारी तरह..!!

परख फ़ज़ा की हवा का जिसे हिसाब भी है..!!
वो शख़्स साहब-ए-फ़न भी है कामयाब भी है..!!

Hawa Quotes in Hindi

जो रूप आई को अच्छा लगे वो अपना लें..!!
हमारी शख़्सियत काँटा भी है गुलाब भी है..!!

हमारा ख़ून का रिश्ता है सरहदों का नहीं..!!
हमारे ख़ून में गंगा भी है चनाब भी है..!!

हमारा दौर अंधेरों का दौर है लेकिन..!!
हमारे दौर की मुट्ठी में आफ़्ताब भी है..!!

कितनी सच्चाई से मुझ से ज़िंदगी ने कह दिया..!!
तू नहीं मेरा तो कोई दूसरा हो जाएगा..!!

मैं ख़ुदा का नाम ले कर पी रहा हूँ दोस्तो..!!
ज़हर भी इस में अगर होगा दवा हो जाएगा..!!

सब उसी के हैं हवा ख़ुशबू ज़मीन ओ आसमाँ..!!
मैं जहाँ भी जाऊँगा उस को पता हो जाएगा..!!

उस के पहलू से लग के चलते हैं..!!
हम कहीं टालने से टलते हैं..!!

बंद है मय-कदों के दरवाज़े..!!
हम तो बस यूँही चल निकलते हैं..!!

मैं उसी तरह तो बहलता हूँ..!!
और सब जिस तरह बहलते हैं..!!

वो है जान अब हर एक महफ़िल की..!!
हम भी अब घर से कम निकलते हैं..!!

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क्या तकल्लुफ़ करें ये कहने में..!!
जो भी ख़ुश है हम उस से जलते हैं..!!

है उसे दूर का सफ़र दर-पेश..!!
हम सँभाले नहीं सँभलते हैं..!!

शाम फ़ुर्क़त की लहलहा उठी..!!
वो हवा है कि ज़ख़्म भरते हैं..!!

है अजब फ़ैसले का सहरा भी..!!
चल न पड़िए तो पाँव जलते हैं..!!

Mahol Shayari

हो रहा हूँ मैं किस तरह बर्बाद..!!
देखने वाले हाथ मलते हैं..!!

तुम बनो रंग तुम बनो ख़ुशबू..!!
हम तो अपने सुख़न में ढलते हैं..!!

हंसी छुपा भी गया और नज़र मिला भी गया..!!
ये इक झलक का तमाशा जिगर जला भी गया..!!

उठा तो जा भी चुका था अजीब मेहमांथा..!!
सदाएंदे के मुझे नींद से जगा भी गया..!!

ग़ज़ब हुआ जो अंधेरे में जल उठी बिजली..!!
बदन किसी का तिलिस्मात कुछ दिखा भी गया..!!

हवा थी गहरी घटा थी हिना की ख़ुशबू थी..!!
ये एक रात का क़िस्सा लहू रुला भी गया..!!

चलो ‘मुनीर’ चलें अब यहांरहें भी तो क्या..!!
वो संग-दिल तो यहां से कहीं चला भी गया..!!

Hawa status

तुम्हें इक बात कहनी थी..!!
इजाज़त हो तो कह दूँ मैं..!!

ये भीगा भीगा सा मौसम..!!
ये तितली फूल और शबनम..!!

चमकते चाँद की बातें..!!
ये बूँदें और बरसातें..!!

ये काली रात का आँचल..!!
हवा में नाचते बादल..!!

हवा हूँ, हवा, मैं बसंती हवा हूँ..!!

प्राण वायु की अहमियत अब पता चल रही है..!!
कोरोना से हर गली जल रही है..!!

बड़े-बड़े दरख्तों को..!!
काट कर जो गलती की है..!!

Hawa Shayari in Urdu

अपनी आंखों से खुद देख..!!
इसी की सजा आज हमें मिलती है..!!

देश में आक्सीजन की कमी खल रही है..!!
कोरोना से हर गली जल रही है..!!

हे मानव तू तो बहुत बलवान था..!!
अब बता बौना क्यों हो गया है..!!

आक्सीजन सिलेंडर की होड़ मची है..!!
पाने के लिए दौड़ मची है..!!

काला बाजारी पल रही है..!!
कोरोना से हर गली जल रही है..!!

आशायें अभी भी उछल रहीं हैं..!!
कोरोना से हर गली जल रही है..!!

जिन्दगी बर्फ की तरह गल रही है..!!
कोरोना से हर गली जल रही है..!!

Hawa Quotes in Hindi

गाड़ी,बंगला,एसी,कार..!!
इस समय सब हैं बेकार..!!

जांन बच जाय किसी तरह..!!
मनुष्य कितना है लाचार..!!

सारी हिकड़ी पिघल रही है..!!
कोरोना से हर गली जल‌ रही है..!!

ठंडी ठंडी चली हवा..!!
लगे बर्फ की डली हवा..!!

दादी कहती मफलर लो..!!
चलती है मुंहजली हवा..!!

स्वेटर, कम्बल, कोट हवा..!!
नहीं किसी से टली हवा..!!

हवा ने गर्द में तहलील कर दिया वर्ना..!!
गुरूर-ए-नगमा थे, निकले थे जब रुबाब से हम..!!

Travel Shayari

गर्मी में सबको भाई..!!
अब ठंडी में खली हवा..!!

रुख़ हवा ने बदल लिया अपना..!!
फ़ैसला हो गया चराग़ जले..!!

ठंडी हवा में दोस्ती नहीं निभा पाएंगे..!!
जरुरत पड़े तो सब कुछ ले लो..!!
मगर रजाई से बाहर नहीं आ पाएंगे..!!

इससे ज्यादा दुश्मनी की हद क्या होगी..!!
सबेरे सबेरे गरम पानी बोलकर..!!
पत्नी ने मुझे ठन्डे पानी से निहला दिया..!!

वही हाँ, वही जो युगों से गगन को..!!
बिना कष्ट-श्रम के सम्हाले हुए है..!!
हवा हूँ हवा मैं बसंती हवा हूँ..!!

वही हाँ, वही जो धरा की बसंती..!!
सुसंगीत मीठा गुंजाती फिरी हूँ..!!
हवा हूँ, हवा, मैं बसंती हवा हूँ..!!

वही हाँ, वही जो सभी प्राणियों को..!!
पिला प्रेम-आसन जिलाए हुई हूँ..!!
हवा हूँ हवा मैं बसंती हवा हूँ..!!

Zindagi safar Shayari

कसम रूप की है, कसम प्रेम की है..!!
कसम इस हृदय की, सुनो बात मेरी..!!
अनोखी हवा हूँ बड़ी बावली हूँ..!!

हे मानव अभी समय है..!!
खूब पेड़ो को लगायें..!!
आक्सीजन से जान बचायें..!!

प्रकृति की‌ छत्र छाया में यदि रहेगें..!!
सच कहता हूं..!!
तभी जीवित बचेंगे..!!

नामों की कोई न गिनती..!!
सच कहना तुम इतने सारे..!!
नाम याद रख पाती कैसे..!!

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चराग़ में रौशनी माना कम है..!!
मग़र मिरे हौंसलों में भी दम है..!!
हवा से है दोस्ताना मेरा भी..!!
उड़ान के वास्ते इक आसमाँ कम है..!!

तेज धूप जब सिर पर चढ़ जाता है..!!
तब हवा बड़ा ही गर्म हो जाता है..!!
जीवन का कर्म हमेशा चलता रहता है..!!
यह तो मौसम है जो हरदम बदलता रहता है..!!

विद्युत से चलने वाले उपकरण भी हवा देते है..!!
लेकिन ये बीमारी को सिर्फ बढ़ावा देते है..!!
इनसे पर्यावरण को प्रदूषित बनाते है..!!
और खुद को बड़ा बुद्धिमान बताते है..!!

Safar ki Shayari

ऑक्सीजन को प्राणवायु कहा जाता है..!!
यह भी सबको हवा से ही मिल पाता है..!!
अगर हवा इतनी तेजी से प्रदूषित होगा..!!
बताओ यहाँ पर जीवन कैसे सम्भव होगा..!!

तेज धूप से जब धरती जलती है..!!
परिश्रम पसीना बनकर निकलती है..!!
जीवन का कितना सुखद आनंद होता है..!!
जब मंद-मंद शीतल हवा चलती है..!!

हवा जब गुब्बारें में समाती है..!!
तो बच्चों के चेहरे पर खुशियां लाती है..!!
हवा हमारे जीवन में बहुत उपयोगी है..!!
यह कविता हमें यही बतलाती है..!!

ना मुस्कुराने को जी चाहता हैं..!!
ना ही नहाने को जी चाहता हैं..!!
अब सर्दी की ठंड बर्दास्त नही होती..!!
सब काम छोडकर रजाई..!!
ओढ़कर सो जाने को जी चाहता हैं..!!

अपना समझो या बेगाना..!!
पर हमारा रिश्ता हैं पुराना..!!
इसलिए हमारा फ़र्ज हैं आपको ये बताना..!!
ठंडी हवाएं अब चालू हो गयी है..!!
इसलिए कृपया रोज रोज मत नहाना..!!

सर्द हवा का मज़ा कितना अलग सा हैं..!!
तन्हा रात में इंतजार कितना अलग सा हैं..!!
वो तो हमसे इतना दूर रहते है..!!
पर उनकी यादों का एहसास कितना अलग सा हैं..!!

दिल की धड़कन रूक सी गई..!!
साँसे मेरी थम सी गई..!!
पूछा हमने जब दिल के डॉक्टर से तो पता चला कि..!!
ठंडी हवा के कारण आपकी यादें दिल में जम सी गई..!!

Safar status in Hindi

सर्द रातों को सताती है यादें तेरी..!!
बुझती नहीं सीने में लगाई आग तेरी..!!
जब भी चलती हैं हवाऐं..!!
दिल को छू जाती है फिर से यादें तेरी..!!

आ भी जा अभी सर्दी का मौसम नही गुजरा..!!
पहाड़ो में ठंडी हवाएं अभी भी बह रही है..!!
सब कुछ है मगर तू पास नहीं..!!
सिर्फ एक तेरी ही कमी बाकी है..!!

ठंडी-ठंडी हवा चली..!!
आकाश हुआ सुहाना..!!
जोकर भी व्हाट्सऐप पढ़ने लगे..!!
शिक्षित हुआ ज़माना..!!

जब भी ठंडी हवाएं चलती हैं..!!
कसम से तेरी बहुत याद आती हैं..!!
दिल कहता है मेरा बार-बार..!!
हमसे मिलने कब आओगें मेरे यार..!!

हवा में सुनी हुयी..!!
बातों पर यकीन ना करें..!!
कान के कच्चे लोग अक्सर..!!
अच्छे दोस्त खो देते है..!!

हवा से कह दो खुद को आजमा के दिखाये..!!
बहुत चिराग बुझाती है एक जला के दिखाये..!!
हवा से कह दो खुद को दिखा के दिखाये..!!
बहुत चिराग़ शराबी है एक जला के..!!

जो रोशनी में खड़े हैं वो जानते ही नहीं..!!
हवा चले तो चैराहों की जिंदगी क्या है..!!
जो रोशनियों में बसे हैं वो जानते ही नहीं..!!
हवा चलती है तो चरागों की जिंदगी क्या है..!!

Zindagi ka safar Quotes

बुझने से जिस चिराग ने इंकार कर दिया..!!
चक्कर लगा रही है हवा उसी के आस-पास..!!
बुझने से जिस चिराग ने उड़ाया कर दिया..!!
चक्कर लग रहा है हवा उसी के आस-पास..!!

दीया बुझाने की फितरत बदल भी सकती है..!!
कोई चिराग हवा पर दवाब तो डाले..!!
किसी भी सहायक उपकरण को बदला जा सकता है..!!
कोई भी चारेग हवा पे दवा नहीं डाली जा सकती है..!!

तुम्हारा सिर्फ हवाओं पर शक गया होगा..!!
चिराग खुद भी तो जल-जल के थक गया होगा..!!
दोस्तों सिर्फ डीजल पर शक हो जाएगा..!!
चिराग खुद भी तो जल-जल के थक जाएगा..!!

तेज धूप से जब धरती जलती है..!!
परिश्रम पसीना बनकर निकलती है..!!
जीवन का कितना सुखद आनंद होता है..!!
जब मंद-मंद शीतल हवा चलती है..!!

तेज धूप जब सिर पर चढ़ जाता है..!!
तब हवा बड़ा ही गर्म हो जाता है..!!
जीवन का कर्म हमेशा चलता रहता है..!!
यह तो मौसम है जो हरदम बदलता रहता है..!!

विद्युत से चलने वाले उपकरण भी हवा देते है..!!
लेकिन ये बीमारी को सिर्फ बढ़ावा देते है..!!
इनसे पर्यावरण को प्रदूषित बनाते है..!!
और खुद को बड़ा बुद्धिमान बताते है..!!

ऑक्सीजन को प्राणवायु कहा जाता है..!!
यह भी सबको हवा से ही मिल पाता है..!!
अगर हवा इतनी तेजी से प्रदूषित होगा..!!
बताओ यहाँ पर जीवन कैसे सम्भव होगा..!!

Safar 2 line Shayari

हवा जब गुब्बारें में समाती है..!!
तो बच्चों के चेहरे पर खुशियां लाती है..!!
हवा हमारे जीवन में बहुत उपयोगी है..!!
यह कविता हमें यही बतलाती है..!!

बड़ी मस्तमौला न..!!
हीं कुछ फिकर है..!!
बड़ी ही निडर हूँ..!!
जिधर चाहती हूँ..!!
उधर घूमती हूँ..!!
मुसाफिर अजब हूँ..!!

न घर-बार मेरा, न उद्देश्य मेरा..!!
न इच्छा किसी की, न आशा किसी की..!!
न प्रेमी न दुश्मन..!!
जिधर चाहती हूँ उधर घूमती हूँ..!!
हवा हूँ, हवा मैं बसंती हवा हूँ..!!

जहाँ से चली मैं जहाँ को गई मैं..!!
शहर, गाँव, बस्ती..!!
नदी, रेत, निर्जन, हरे खेत, पोखर..!!
झुलाती चली मैं झुमाती चली मैं..!!
हवा हूँ, हवा मै बसंती हवा हूँ..!!

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चढ़ी पेड़ महुआ, थपाथप मचाया..!!
गिरी धम्म से फिर, चढ़ी आम ऊपर..!!
उसे भी झकोरा, किया कान में ‘कू’..!!
उतरकर भगी मैं, हरे खेत पहुँची..!!
वहाँ, गेंहुँओं में लहर खूब मारी..!!

ना थी जिसको मेरे प्यार की कदर..!!
इत्तेफ़ाक़ से उसको ही चाह रहे थे हम..!!
उसी दिए ने जलाया मेरे हाथों को..!!
जिसको हवा से बचा रहे थे हम..!!

धड़कते मौसमों का दिल..!!
महकती ख़ुश्बूओं का दिल..!!
ये सब जितने नज़ारे हैं..!!
कहो किस के इशारे हैं..!!

Safar manzil Shayari

अपनी औकात देख..!!
प्रकृति के आगे..!!
बौना क्यों हो गया है..!!
तेरी हर ख्वाहिस तुझे छल‌ रही है..!!
कोरोना से हर गली जल रही है..!!

चुभती है तीरों जैसी..!!
कल की वो मलखाती हवा..!!
बाहर मत आना भइया..!!
लिए खड़ी दो नली हवा..!!

मीठी मीठी और नरम सी..!!
ठंडी ठंडी कभी नरम सी..!!
बोली बदल बदल के अपनी..!!
सबको रोज छकाती कैसे..!!

आँधी बन के आ जाती हो..!!
सारे जग पर छा जाती हो..!!
धूल धुंए का जादू बनकर..!!
अपना रंग जमाती कैसे..!!
पुरवाई, पछुआ, बासंती..!!

पहर दो पहर क्या, अनेकों पहर तक..!!
इसी में रही मैं..!!
खड़ी देख अलसी लिए शीश कलसी..!!
मुझे खूब सूझी..!!
हिलाया-झुलाया गिरी पर न कलसी..!!
इसी हार को पा..!!
हिलाई न सरसों, झुलाई न सरसों..!!
मज़ा आ गया तब..!!
न सुधबुध रही कुछ..!!
बसंती नवेली भरे गात में थी..!!
हवा हूँ, हवा मैं बसंती हवा हूँ..!!

बोल हवा तू आती कैसे..!!
पेड़ों को ललचाती कैसे..!!
हाथ पाँव ना दिखते तेरे..!!
करती रहती फिर भी फेरे..!!
रंग रूप को हम लोगों से..!!
कुछ तो बता, छिपाती कैसे..!!

मुझे देखते ही अरहरी लजाई..!!
मनाया-बनाया, न मानी, न मानी..!!
उसे भी न छोड़ा..!!
पथिक आ रहा था, उसी पर ढकेला..!!
हँसी ज़ोर से मैं, हँसी सब दिशाएँ..!!
हँसे लहलहाते हरे खेत सारे..!!
हँसी चमचमाती भरी धूप प्यारी..!!
बसंती हवा में हँसी सृष्टि सारी..!!
हवा हूँ, हवा मैं बसंती हवा हूँ..!!

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